Friday, August 31, 2012

मदन मोहन मालवीय और मनमोहन सिंह

हमारे एक मित्र हैं- बाबा रामदास.. उम्र में डेढ गुने लेकिन विचार विनिमय में समान और समर्पित रहते हैं । वे रोज किसी न किसी बात पर अपनी राय रखते हैं जो विचारणीय भी होती है और मनोरंजक भी । उन्होंने अखबार में प्रकाशित एक न्यूज़ कोयला घोटाले में मिस्टर 'क्लीन भी काले' का जिक्र करते हुए बड़ी मार्मिक बात कही के देखो नाम में भी काम छुपा रहता है ।
मदन मोहन मालवीय को देखें - मद-न, मोह-न, माल-वीय ; मतलब जिसे मद न हो, मोह न हो और जो 'माल' अर्थात धन को 'वीय' अर्थात पैदा करें। उन्होंने दुनिया से धन माँगा, और अपनी संपत्ति देकर 'संस्कृत विश्वविद्यालय' की स्थापना कर दुनिया को ज्ञान का तीर्थ निर्माण कर सौंप गए ।
दूसरे अपने देश के प्रधानमंत्री हैं मनमोहन सिंह - मन-मोह-न सिंह; जो दो बार प्रधानमंत्री बने लेकिन जनता का 'मन-मोह-न' सके । कभी मुस्कुराते नहीं देखे जाते, 'सिंह' हैं फिर भी मौनी बाबा की तरह चुप रहते हैं । यदि एक बार भी मिस्टर क्लीन ने 'सिंह' गर्जना कर दी होती तो शायद इतने घोटाले न होते ? पर वे तो ठहरे मन-मोहन, जो १० जनपथ के मोह में सोनिया जी के 'मन-मोहन' हैं, सो प्रधानमंत्री रहेंगे ही !!!!

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